Friday, December 1, 2017

कविता संग्रह ।

  कविता संग्रह ।

पञ्जी काटी पञ्जी काटी पञ्जी भफला
पञ्जीर ढाकी ड जाछे दक्खिन टला
घुर्रे घुर्रे घुर्रे ढाकी सुन बातला
दक्खिन गावेंर छरा ठोट हेदला
सदाकार सङ साथि बोठ बगलत्
पंजाल पाञ्जीला राखिम् तोर उपरत्
औह्लिये बौह्लिये जाले पञ्जीला मोर
छुटाते छुटाते जेर्कट्टी हवे भोर
पञ्जी काटिये फुली गवाम् रङ्चङियाँ
गटाली करिये फाटी पुरिम् बन्हिँयाँ
पेर्वाचखी मकर्दाँती सिक्री भराम
सुन्दर तिनफटिया धक्रा गह्राम
से धक्रा लिये जाम् गौरीगंजेर हाट
बेचिये हवे मोर सौदा ठाटबाट
फेयर लवली आर लिप्लाइनर
लागाय हमु गे मुइं बड़ा सुन्दर
हाय हाय कोय कर्वे मारिये सिटी
गोटे चेङ्रार नज़र महरे विती !

-रवि लाल कोचिल्दा
कोहोवरा झापा ।

No comments:

Post a Comment

introduction of tajpuriya society

Tajpuriya caste is one of the indigenous people of Nepal, living in the flat terrain of the Far East South Terai of Nepal. Tajpurians hav...